Vishwaguru ? ????????? [ ???????? ????? ]

???????? ?????; Nilotpal Mrinal

ISBN 10: 8119555546 ISBN 13: 9788119555543
Verlag: Hind Yugm, 2026
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Inhaltsangabe:

विश्वगुरु हमारे समय की महागाथा है, जिसमें प्रतिभा से भरे युवा, उनके सपने, अवसरों की सीमा, अपने धागों में उलझा हुआ समाजशास्त्र और सत्ता से जकड़ा हुआ राजनीतिशास्त्र आमने–सामने खड़े दिखाई देते हैं। ये उपन्यास किसी एक नायक या खलनायक की कहानी नहीं बल्कि उस पीढ़ी का आख्यान है जो शिक्षा, रोज़गार, आंदोलन, समाज और सत्ता के बीच धप्पा–धप्पी खेल रही है। कभी अवसर प्रतिभा को धप्पा देता है, कभी प्रतिभा उपलब्धियों को।
चिन्मय, दर्पण, अंगद, कृपालु, लावण्या जैसे पात्र ग्रामीण और क़स्बाई भारत के उस यथार्थ से निकले हैं जहाँ एक वर्ग के लिए सरकारी नौकरी इंद्रासन पाने की राह है तो दूसरा वर्ग वह है जिसके लिए निजी क्षेत्र कुबेर के खजाने तक जाने का रास्ता।

इन सबके सामने सत्ता की स्वाभाविक राजनीति है जिसके सुरंग का आकार इन सबसे बड़ा है।

लखी बैरागी सूखी हुई नदी के किनारे बाउल गीत गा रहा है और नदी के उस पार अवध बिहारी, बोगो महतो, विलायती सिंह जैसे चरित्र हैं जो सत्ता, हिंसा और धन के त्रिकोण से निकले हैं और इसके तीनों कोण अंततः आम आदमी को ही चुभते हैं।

विश्वगुरु बेरोजगारी, दहेज, पारिवारिक संकट, जाति, धर्म, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के नैतिक संकट को बिना किसी उपदेश या उलाहना के यथार्थ की जमीन पर ईमानदारी और साहस के रेशे से बुनता है।

ये उपन्यास न किसी विचारधारा का घोषणापत्र है और न किसी दल का समर्थन-पत्र। ये अपने समय का सच्चा बयान है।

ये उपन्यास उन पाठकों के लिए है जो अपनी मेज पर समकालीन भारत का नक्शा रखकर उसे विचारधाराओं की गिरह से मुक्त होकर समझना चाहते हैं।

जय हो।

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Bibliografische Details

Titel: Vishwaguru ? ????????? [ ???????? ????? ]
Verlag: Hind Yugm
Erscheinungsdatum: 2026
Einband: Softcover
Zustand: New

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