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वक़्ते सफ़र: जीवन की शाम के कुछ पैग़ाम - Softcover

राधा कृष्ण सहगल

 
9798900236209: वक़्ते सफ़र: जीवन की शाम के कुछ पैग़ाम

Inhaltsangabe

दिल के हँसते ज़ख्म तारों को दिखाना चाहता हूँ कुछ नए नग़में फ़लक पर गुनगुनाना चाहता हूँ... कहिए क्यों हम दुनिया से खाली हाथ रवाना हों उस समय तो साथ हमारे होंगे खज़ाने सौ-सौ यादों के... लाख सुनाओ बातें दिल की लाख सुनाओ अफ़साने कुछ तो है अनकहा रहा है कुछ तो है अनकहा रहेगा... न तू आस रख न निरास हो न तू मोह कर न उदास हो न उतर सके कभी चढ़ के जो बस उसी मै की तुझे प्यास हो... महफ़िल हज़ार ख़त्म हों खाली नहीं मगर दो चार दिन हैं और तो दो चार ही सही...

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