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सपनों के पर्वत पर बर्फ़ जमी है - Hardcover

प्रदीप कुमार सिंघल 'दीप'

 
9798897441174: सपनों के पर्वत पर बर्फ़ जमी है

Inhaltsangabe

यह एक काव्य संकलन है जो प्रेम, आकांक्षा, प्रकृति, समाज और राष्ट्र सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को समेटे हुए है। यह संकलन व्यक्तिगत आनंद के क्षणों और भावनाओं की ऊँची उड़ान को भी प्रतिबिंबित करता है। कविताएँ हृदयस्पर्शी हैं और व्यक्तिगत भावनाओं से इतनी जुड़ी हुई हैं कि वे सीधे पाठक के मनोभावों को व्यक्त करती प्रतीत होती हैं। इसमें सामाजिक चेतना की गहरी पहचान भी है, जहाँ लेखक के निजी अनुभव इस प्रकार अभिव्यक्त हुए हैं कि वे संपूर्ण समाज की सामूहिक भावनाएँ प्रतीत होते हैं। संपूर्ण रूप से, यह एक अर्थपूर्ण काव्य संकलन है जो आज के समय की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक और साहित्यिक विकृतियों पर विचार करता है।

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