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9798895564653: ओ मेरी पाठशाला

Inhaltsangabe

विद्यालय पर एकाग्र काव्य-संग्रह ओ मेरी पाठशाला न केवल प्रयोगपरकता का प्रमाण है, वरन् एक विचार को संवेदना और विषय को भावना के साथ प्रस्तुतिकरण का अनोखा अंदाज भी है। सागर कुमार शर्मा छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि साहित्यकार, विशेषकर कवि-रूप में तो प्रसिद्ध हैं ही। एक अनुभवी अध्यापक होने के नाते उन्होंने गद्य में प्रस्तुत होने वाली रचनाओं को पद्य में रूपांतरिक करके कीर्तिमान स्थापित किया है और साथ ही यह संदेश संप्रेषित कर दिया है कि कविता-रूपी सरोवर में भाव और विचार-रूपी बकरी और शेर एक घाट में आकर पानी पीते हैं। पाठशाला में संगृहीत कविताएँ इस तरह संबद्ध और क्रमबद्ध हैं कि प्रत्येक अपने आपमें पूर्ण और स्वतंत्र है और परस्पर पूरकता के रूप में पूर्णता की ओर प्रस्थित भी। इसमें अनेक रचनाएँ ऐसी हैं, जिन पर कविता लिखना सबके वश की बात नहीं है। एक आदर्श अध्यापक, जो पाठशाला के प्रति पूर्ण समर्पित है और एक कुशल कवि, जो शैक्षणिक अंगोपांगों को संवेदना के साँचे में ढाल पाने में समर्थ हो, वही प्रवीणता के साथ पाठशाला का प्रणयन कर सकता है। प्रस्तुत कृति में पाठशाला के प्रादर्श की आधारभूत संरचना के साथ विकास की संभावनाएँ भी संग्रथित हैं। पाठशाला में ड्रेस कोड, पर्यावरण-संरक्षण, एनसीसी, कराते-प्रशिक्षण, नशा-मुक्ति अभियान, यूथ एवं इको क्लब, मतदान-महात्म्य, शारदालय, संकल्प सेवा-साधना के माध्यम से परिवर्तित नवीन स्वरूप के साथ सेवा-निवृत्ति पर्यंत ज्ञान की मशाल लिए कवि सागर कुमार शर्मा प्रस्तुत हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए कवि को बधाई और शुभकामनाएँ भी। डॉ. विनय कुमार पाठक

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