काशी के छप्पन विनायक एवं राजा दिवोदास की कहानी - Softcover

संतोष कुमार सिंह

 
9798892775175: काशी के छप्पन विनायक एवं राजा दिवोदास की कहानी

Inhaltsangabe

हमें बड़ा गर्व है कि हमें इस धरती पर, खासकर महादेव के नगर, पवित्र काशी में जन्म लेने का सौभाग्य मिला। महादेव की अनुकंपा से, हमें जीवन में कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुई। जैसे ही हम पचास वर्ष की आयु को छूने लगे, हमारे मन में काशी के प्रति और हमारे सनातन धर्म के मूल्यों को पुनः स्थापित करने की इच्छा जागृत हुई, और इसी भावना के साथ हमने विश्व वैदिक सनातन न्यास की नींव रखी। हमने यह भी निश्चय किया कि ज्ञानवापी मस्जिद, जो पहले काशी विश्वनाथ मंदिर था, उसे वापस हिंदुओं को सौंपने के लिए कानूनी संघर्ष भी करेंगे। इसी बीच, काशी के विषय पर कुछ विद्वानों से चर्चा हुई, जिसमें काशी के 56 विनायकों के बारे में जानकारी मिली, जो कि काशी के पौराणिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण भाग है। फिर हमने इस विषय पर गहन अनुसंधान शुरू किया। काशी के इन 56 विनायकों की प्रतिष्ठा के बारे में अधिक जानने की जिज्ञासा में, हमें पता चला कि इनमें से अधिकांश विनायक की मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, कुछ को स्थानांतरित किया गया है, और कुछ का तो अब कोई अता-पता ही नहीं है। इस दुर्दशा को जानकर हमारा मन बहुत दुखी हुआ, और हमने इन्हें पुनः प्रतिष्ठापित करने का संकल्प लिया। क्षतिग्रस्त और नष्ट हो चुके अधिकांश विनायकों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेते हुए, हमने सोचा कि सभी 56 विनायकों की पेंटिंग्स सनातन धर्म से जुड़े किसी कलाकार से बनवाएं। इन सभी कार्यों को पूरा करने के बाद, हम इस अद्भुत पौराणिकता को जीवंत करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। मैं अपनी इस पुस्तक को विश्व भर में सनातन धर्म के अनुयायियों और प्रेमियों के समक्ष विनम्रतापूर्वक समर्पित करता हूँ।

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