यह पुस्तक मानव जीवन, भावनाओं और समाज के भीतर छिपे उन सवालों को सामने लाने का प्रयास है जिन्हें अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। इसमें जीवन की सच्चाइयों, संघर्षों, अकेलेपन, संवेदनाओं और इंसान की आंतरिक यात्रा को शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। लेखक ने सरल लेकिन गहरे भावों से यह दिखाने की कोशिश की है कि मनुष्य के भीतर कितनी उलझनें, डर और उम्मीदें एक साथ रहती हैं। यह पुस्तक पाठकों को अपने भीतर झांकने, जीवन को नए दृष्टिकोण से समझने और संवेदनशीलता के महत्व को महसूस करने के लिए प्रेरित करती है।
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रवि कुमार जांगिड़ राजस्थान के बाड़मेर जिले से हैं और सामाजिक कार्यों तथा पशु संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे जीव रक्षा केंद्र नामक संस्था के संस्थापक हैं, जो घायल और असहाय पशुओं की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने का कार्य करती है। 2022 में उन्होंने इस अभियान की शुरुआत की और लगातार सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। रवि कुमार जांगिड़ का मानना है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संबंध होना चाहिए। उनकी लेखनी जीवन, भावनाओं और समाज के गहरे सवालों को सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।
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Anbieter: AHA-BUCH GmbH, Einbeck, Deutschland
Taschenbuch. Zustand: Neu. Neuware. Artikel-Nr. 9789375430896
Anzahl: 2 verfügbar