उबलते पानी के मेंढ़क, समसामयिक घटनाओं एवं ज्वलंत मुद्दों पर लेखक के विचारों से अवगत कराती इक्कीस कविताओं का संग्रह है। रोज़मर्रा की सरल भाषा में लिखी कविताओं में हर उम्र का पाठक अपने आप को वर्णित होता देखता है। कहीं ना कहीं उसके अपने जीवन में घटी परिस्थितियों का वर्णन होता देख, पाठक बार-बार इन कविताओं को गुनगुनाता है, जीता है, ओर आने वाले कल को बेहतर बनाने की कल्पना करता है।
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सुधीर मलिक, पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटंट हैं, ओर अपने ईमानदार लेखन के लिए जाने जाते हैं। भारत के विभाजन पर आधारित 'आइ एम नाट रेफ़्यूजी' इनका पहला फ़िक्शन नावल है। इससे पहले अपने पिता की उर्दू में लिखी शायरी 'जंगनामा', का हिंदी में लिप्यंतरण किया। इन्वेस्टमेंट और परसोनल फ़ाइनैन्स पर 'द टैक्स्मैन' द्वारा प्रकाशित की पाँच पुस्तकें, एवेम क़रीबन १५० लेख 'द हिंदुस्तान टाइम्ज़' अख़बार के लिए लिखे। क़रीबन सौ से भी ज़्यादा बार शेयर मार्किट पर लाईव टेलिविज़न डिबेट्स में भाग लिया। और, राष्ट्रीय मंचों पर विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखते आएँ हैं।
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Anbieter: AHA-BUCH GmbH, Einbeck, Deutschland
Taschenbuch. Zustand: Neu. Neuware - ????? ???? ?? ??????, ???????? ?????? ??? ?????? ??????? ?? ???? ?? ??????? ?? ???? ????? ?????? ??????? ?? ?????? ??? ????????? ?? ??? ???? ??? ???? ??????? ??? ?? ???? ?? ???? ???? ?? ?? ?????? ???? ????? ??? ???? ?? ???? ???? ???? ???? ??? ??? ???????????? ?? ????? ???? ???, ???? ???-??? ?? ??????? ?? ????????? ??, ???? ??, ?? ??? ???? ?? ?? ????? ????? ?? ?????? ???? ??? Artikel-Nr. 9789371562041
Anzahl: 2 verfügbar