पुस्तिका एक प्रयास है,जिसके माध्यम से लेखक नें अपने अनुभवों को साझा किया है । जज्बातों और भावनाओं को शब्दों के माध्यम से परोसना पानी पर चलने के समान है । इस पुस्तिका में प्रत्येक कविता एक सामाजिक कलेवर को प्रतिबिंबित करती है । संयम,निरंतर प्रयास को जीवन चक्र का अटूट हिस्सा मानते हुए और "हर हार में जीत छुपी है" इस कथन के मर्म को आपके समक्ष रखने का प्रयास मात्र है ।
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शैलेंद्र शर्मा एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते है । जीवन के विभिन्न पहलू, समाज का व्यावहारिक और दार्शनिक दृष्टि से अवलोकन करना इनके काव्यलेखन के मुख्य विषय हैं । अपनी कविताओं में भावनाओं, परिस्थिति, शब्दों के चयन को लेकर काफ़ी सजग हैं। वर्तमान में देश की अग्रणी डेरी कंपनी में कार्यरत हैं । कर्म के संतुलन और अपने सामाजिक योगदान को लेकर उनकी ये पंक्तियां काफ़ी प्रासंगिक हैं । "एहतियात बरतिये,बुझना सबको है जब तक तेल है,जलना सब को है आराम से जलिए और रोशन कर दें वो कोना जहाँ तस्वीर में एक दिन टँगना सब को है "
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Anbieter: AHA-BUCH GmbH, Einbeck, Deutschland
Taschenbuch. Zustand: Neu. Neuware - ???????? ?? ?????? ??,????? ?????? ?? ???? ??? ???? ??????? ?? ???? ???? ?? ? ???????? ?? ??????? ?? ?????? ?? ?????? ?? ?????? ???? ?? ???? ?? ???? ?? ? ?? ???????? ??? ???????? ????? ?? ??????? ????? ?? ??????????? ???? ?? ? ????,?????? ?????? ?? ???? ???? ?? ???? ?????? ????? ??? ?? '?? ??? ??? ??? ???? ??' ?? ??? ?? ???? ?? ???? ????? ???? ?? ?????? ????? ?? ? Artikel-Nr. 9789370926004
Anzahl: 2 verfügbar