'कुछ सोचा कुछ कहा' वस्तुतः कुछ विचारो की अभिव्यक्ति हैं, जो चलते फिरते, उठते बैठते एक आम महानगरीय जीवन में किसी भी व्यक्ति के दिलो दिमाग में आते जाते रहते हैं / कोई विशेष साहित्यिक विधा से इतर ये कवितायेँ सिर्फ दिलो दिमाग में आते जाते खयालो का एक लेखा जोखा हैं / इनके विचार और विधा सबकुछ अनियोजित और अविरल हैं, फिर भी संभवतः पढ़ने वालो के ये कविताये मौलिक विचारो की एक ताज़गी भरी सुगंध दे सकेंगे / इसी आशा के साथ - प्रस्तुत हैं - 'कुछ सोचा कुछ कहा'
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शिक्षा से चार्टर्ड अकाउंटेंट, पेशे से एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत सौरभ उत्तर प्रदेश के लखनऊ से है / वर्तमान में कुछ वर्षो से मुंबई में रचे बसे हैं /कवितायेँ, कहानिया और नाटक लिखने में युवावस्था से ही सघन रूचि रखते है / सामाजिक मुद्दों, स्त्री सशक्तिकरण, व्यंग और विशेष रूप से बाल नाटकों और साहित्य में विशेष रूचि रखने वाले सौरभ हिंदी और अंग्रेजी साहित्य और फिल्मो को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम मानते हैं /
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Anbieter: California Books, Miami, FL, USA
Zustand: New. Artikel-Nr. I-9789370924475
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Anbieter: AHA-BUCH GmbH, Einbeck, Deutschland
Taschenbuch. Zustand: Neu. Neuware - '??? ???? ??? ???' ??????? ??? ?????? ?? ?????????? ???, ?? ???? ?????, ???? ????? ?? ?? ???????? ???? ??? ???? ?? ??????? ?? ???? ????? ??? ??? ???? ???? ??? / ??? ????? ????????? ???? ?? ??? ?? ???????? ????? ???? ????? ??? ??? ???? ????? ?? ?? ???? ???? ??? / ???? ????? ?? ???? ????? ???????? ?? ????? ???, ??? ?? ?????? ???? ???? ?? ?? ??????? ????? ?????? ?? ?? ????? ??? ????? ?? ?????? / ??? ??? ?? ??? - ???????? ??? - '??? ???? ??? ???'. Artikel-Nr. 9789370924475
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